«

»

Apr
06

विजय का तहे दिल से शुक्रिया

सभी ब्लागर बन्धुओँ को मेरा सादर नमस्कार

मै राम चन्द्र मिश्र ये पोड कास्ट अपने अजीज दोस्त श्री विजय वडनेरे को समर्पित करता हूँ, जिन्होने मेरे एक अदने से अनुरोध का महान सम्मान करते हुये मेरे लिये ये गज़ल गायी, आप भी सुनिये जगजीत सिंह की सुरीली, मधुर आवाज मेँ जिसका मिसरा है: “समझते थे, मगर फ़िर भी न रखीँ दूरियाँ हमने”|

डाउन लोड कडियाँ: विशेषतया विजय के लिये बाकी सब के लिये

facebook comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>


Facebook login by WP-FB-AutoConnect