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Sep 01

[प्रत्येक..] ललितलवंगलतापरिशीलनकोमलमलयसमीरे। मधुकरनिकरकरम्बितकोकिलकूजितकुञ्ज कुटीरे॥

आपने आनंदमठ तो ज़रूर पढ़ा होगा? नहीं पढ़ा? तो शायद फ़िल्म देखी होगी? कम से कम वंदे मातरम् तो ज़रूर पढ़ा-सुना होगा। मुझे दोनों ही सौभाग्य प्राप्त हुए हैं। यहां संगीत की बात होती है इसलिये उपन्यास को अभी भूल जाते हैं और ज़रा इस उपन्यास पर बनी फ़िल्म और इस फ़िल्म के एक गाने की ओर मुखातिब होते हैं।1952 में बनी इस फ़िल्म में लता और हेमंतदा का गाया वंदे मातरम् आज भी उतना ही ओजपूर्ण है जितना उस समय था। हैरान होता हूँ कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर इस गाने को बजाने की सुध किसी को क्यों नहीं रहती। खैर, इसे

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