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Jan 02

वापस इट्ली मे

मित्रों मै अब वापस इटली आ गया हू, मुझे कुछ टिप्पणियां मिली जिनमे सुनील जी के बारे मे बताया गया, इस सन्दर्भ मे मै कहना चाहूंगा कि मेरा उनसे सम्पर्क पिछ्ले महीने हो चुका है, और मै भी उनके ब्लाग का नियमित पाठक हू|

आप सबको नव वर्ष की शुभकामनायें | मेरा हैप्पी न्यू इयर तो बस मे ही हो गया (मनाया) था, वो इस लिये कि मै 31 की सुबह ग्रीनोबल से चला था, सुबह 4:30 पर मै और डा पाठक रेलवे स्टेशन के लिये चले, रात को भारी हिमपात हुआ था और हमें अपनी ट्रालियों को घसीटने मे …. याद आ रही थी: वही हिम और हिमपात जो कल रात को यहां के भारतीय होटल से रात का खाना खाकर वापस आते समय रोमांचक लग रही थी| आखिर हम 1 किलोमीटर चलकर गार(स्टेशन) पहुंचे, पाठक जी खुश थे कि उनकी ट्रेन सही समय से है जिससे  फ्लाइट मिस नही होगी| मुझे यहा से शाम्ब्री जाने के लिये 10 बजे तक तीन गाडिया थी और वहा से मुझे 10:58 पर मिलान के लिये जाना था, फिर भी मैने सात बजे वाली सवारी की और आठ बजे शाम्ब्री आ गया, ठन्ड बहुत थी मैने स्वयँ को कवर किया और स्टेशन के बाहर निकल गया, मेरे पास घूमने का समय तो था लेकिन -5 डिग्री का बाहरी तापमान और Ice बन गयी snow पर टहलना आसान नही था इसलिये मै एक बार मे घुस गया जहा गरमा गरम काफी पी, चिप्स खाये और आधे घंटे बैठकर वापस स्टेशन के प्रतीक्षालय मे ही बाकी की प्रतीक्षा की| यहा से टी ज़ी वी पर बैठना था जो पेरिस से मिलान के मार्ग पर चल रही थी यूरो सिटी नाम से, सामान आदि रखने के बाद मैने समय बिताने के लिये अपने लैपटाप पर फिल्म लगा ली, वही जो डा शशांक ने लियान मे मुझे दी थी और बताया था कि अमेरिकन क्लासिकल फिल्म इतिहास मे इसको एक तरफ और बाकी सब को एक तरफ करके तुलना होती है, और जिसका नाम है, Gone With The Windयह 4 घंटे की फिल्म है जिसका पहला भाग मैने लियान से आते समय देखना प्रारम्भ किया था| 2:45 पर मिलान का समय था लेकिन यह पहले से ही 15 मिनट लेट थी फिर हम 3 बजे मिलान मे थे, यहा भी काफी बरफ थी और वायु मे गलन, मै बाहर निकला तो इस बार दूसरी तरफ चला गया और एक ऐसी दुकान मे जा पहुंचा जहां मेरे लिये कुछ उष्ण कटिबन्धीय खाद्य पदार्थ उपलब्ध थे, मैने 5-6 किलो सामान खरीद लिया|

यहा से 17:10 पर ट्रेन थी, रुचिकर मसला ये हुआ कि जिस डिब्बे मे मेरा आरक्षण था, उसके साथ कुछ समस्या थी जिसका निदान करते करते ट्रेन 15 मिनट लेट हो गयी पर समाधान न मिला, सो उसमे न ही प्रकाश रहा और न उचित तापमान, अतः कैरोत्सा (डिब्बा) बदलना पडा, 21:30 पर फैल्कोनारा मे दूसरी ट्रेन ली उससे फैब्रियानो पहुंचे जहा से वो बस ली जिसने कैसल्रायमोन्दो पहुंचाया यहा बस बदली और अपने घर के पास उतरे रात के 00:30 पर|

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