राम चन्द्र मिश्र का हिन्दी जाल स्थल
वर्ड प्रेस के सहयोग से। Best Viewd in FireFox & Chrome Browsers
-
Feb51 Comment
इस बार, पहले तो सोचा था कि दिवाली घर पर मनायेंगे, इसलिये १५ अक्टूबर को रिटर्न टिकट लिया था। पर परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनीं कि चेन्ज कराना पड़ा और २३ नवम्बर की टिकट ले ली गयी। अमेरिका आये हुये अभी हमको ८-९ महीने ही हुये थे। शाम को ६ बजे की Lufthansa की फ़्लाइट थी। Lenox से एयर पोर्ट के लिये सीधी ट्रेन मिलती है तो हम साढ़े तीन बजे तक वहाँ पहुंच चुके थे।
इस बीच समय काफ़ी था तो कुछ तस्वीरें भी लीं, अभी तो ऐयर पोर्ट के बाहर की तस्वीरें देखिये।
ऊपर के दोनों चित्रो मे टैक्सी॒न्ग करते हुये जहाज देखे जा सकते हैं।
अन्दर जाकर पहले लुफ़्तहान्सा की डेस्क से अपना सामान चेक्ड इन किया बोर्डिन्ग पास लेकर सिक्योरिटी के लिये जाने से पहले थोड़ी देर एयर पोर्ट का जायजा लिया। कुछ और तस्वीरें अगली पोस्ट में।
–
राम चन्द्र मिश्र।
-
Aug25No Comments
पिछले रविवार अचनाक मन्दिर जाने का प्रोग्राम बन गया। सुबह तो टाइम से उठ गये थे लेकिन निकलते निकलते २ बज गये। जहाँ हम जा रहे थे हिन्दू टेम्पल, नाम कुछ अजीब लगा अब मन्दिर तो हिन्दुओं का ही होता है, शायद इसलिये। तो ये हिन्दू टेम्पल अटलांटा से लगभग १३.३ मील (~22.2 कि मी) है।
अभी तक हम बे-कार ही हैं इसलिये वाया एयरपोर्ट जाना हुआ, वैसे तो एयर पोर्ट गये भी काफ़ी दिन हो गये थे, तो अच्छा ही लगा उधर जाकर।
पहले ट्रेन से गये एयर पोर्ट तक फ़िर वहां से बस ली गयी, हम तीन लोग थे, ’वसन्त राज’ और ’कृष्णा’ के साथ।
पहुंचने से पहले तक मन्दिर के बारे मे नही सोचा था कि कैसा होगा, क्योकि गया भी बहुत कम मन्दिरों मे हूँ, तो पहुंचने पर पता लगा कि ये दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला मे बना मन्दिर है।
फ़िर तो भगवान भी, बहुत से जिनके कि नाम याद रखना भी मुश्किल है, घर मे पूछा गया तो बस एक ही बता पाये।
खूब सारे देवताओं के दर्शन किये फोटो न ले पाये, यूरोप के विपरीत यहाँ भी भारत के तरह तस्वीरें लेना वर्जित है, जब कि पन्डित जी आरती स्पांसरिन्ग के लिये परिसर मे ही आवाज लगा रहे थे।
प्रसाद वितरण हुआ ही नही, भूख लग गयी थी तो बेसमेन्ट मे एक रेस्टॉरेन्ट भी उपलब्ध था वहाँ पोन्गल उपमा और कर्ड राइस तथा टामेरिन्ड राइस की व्यवस्था थी। भगवान की पूजा के बाद पेट पूजा की और वापस चल दिये अटलांटा की ओर। लिखने को ज्यादा कुछ है नही, आप लोग तस्वीरें ही देखते जाइये
।















