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	<title>Comments on: आपकी आवाज मे आज संजय राणा की आवाज</title>
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		<title>By: Sanjay Rana</title>
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		<dc:creator>Sanjay Rana</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2009 10:31:55 +0000</pubDate>
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		<description>प्रधान मंत्री जी मै भारत का एक आम नागरिक हूँ, मेरी बात पर कृपया ध्यान देना। 

जो ये हमारे देस में आर्क्षन देने की व्यवस्था दी जा रही हे क्या यह सही हे मुझे तो यह बिल कुल सही नहीं लगती क्योकि इस व्यवस्था से देस के अंदर जाती भेद आता हे ओर इससे देस के लोगो में देस के प्रति भावना कम व् जाती के प्रति जयादा हो जाती हे क्या यह व्यवस्था धीरे धीरे देस को बाटने का काम नहीं करती सरकारी नोकरीयो में प्दोन्ति का मामला हो या एजूकेशन के क्षेत्र में योग्य छात्रो के अड्मिशन को लेकर विवाद  मै यह नहीं कहता कि कमजोर वर्गों का उथान नहीं होना चाहिय लेकिन आर्क्षन के आधार पर योग्यता को कभी नहीं नकारना चाहिय एक योग्य व्यक्ति के स्थान पर आर्क्षन के आधार पर किसी अयोग्य व्यक्ति को बिठा देना अन्याय हे और देस हित के लिय भी खतरनाक हे 

योग्यता के आधार पर ही योग्य वयाक्तिया को नियूकुत किया जाना चाहिय अन्यथा देस में जाती वाद भाषा वाद क्षेत्र्य वाद और अंत में वाद विवाद में पूरा देस  बट कर रह जायगा जैसे     गुलामी के समय पुराना भारत था वेसे भी चीन से भारत को छोटे छोटे टुकडो में बाटने की आवाजे सुनाई दे रही हे यहाँ पर समान नागरिकता या समान नागरिक सहिता होना आवश्यक हे नहीं तो देस अलग अलग क्षेत्रियता धर्म व् जातियों का पिटारा बनकर रह जायगा और इस पिटारे को ना तो हमारे प्रधान मंत्री जी और ने ही और कोई संभाला पायगा

धनवाद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधान मंत्री जी मै भारत का एक आम नागरिक हूँ, मेरी बात पर कृपया ध्यान देना। </p>
<p>जो ये हमारे देस में आर्क्षन देने की व्यवस्था दी जा रही हे क्या यह सही हे मुझे तो यह बिल कुल सही नहीं लगती क्योकि इस व्यवस्था से देस के अंदर जाती भेद आता हे ओर इससे देस के लोगो में देस के प्रति भावना कम व् जाती के प्रति जयादा हो जाती हे क्या यह व्यवस्था धीरे धीरे देस को बाटने का काम नहीं करती सरकारी नोकरीयो में प्दोन्ति का मामला हो या एजूकेशन के क्षेत्र में योग्य छात्रो के अड्मिशन को लेकर विवाद  मै यह नहीं कहता कि कमजोर वर्गों का उथान नहीं होना चाहिय लेकिन आर्क्षन के आधार पर योग्यता को कभी नहीं नकारना चाहिय एक योग्य व्यक्ति के स्थान पर आर्क्षन के आधार पर किसी अयोग्य व्यक्ति को बिठा देना अन्याय हे और देस हित के लिय भी खतरनाक हे </p>
<p>योग्यता के आधार पर ही योग्य वयाक्तिया को नियूकुत किया जाना चाहिय अन्यथा देस में जाती वाद भाषा वाद क्षेत्र्य वाद और अंत में वाद विवाद में पूरा देस  बट कर रह जायगा जैसे     गुलामी के समय पुराना भारत था वेसे भी चीन से भारत को छोटे छोटे टुकडो में बाटने की आवाजे सुनाई दे रही हे यहाँ पर समान नागरिकता या समान नागरिक सहिता होना आवश्यक हे नहीं तो देस अलग अलग क्षेत्रियता धर्म व् जातियों का पिटारा बनकर रह जायगा और इस पिटारे को ना तो हमारे प्रधान मंत्री जी और ने ही और कोई संभाला पायगा</p>
<p>धनवाद</p>
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