मेरी बेटी पूर्वा का एक आलेख आजाद भारत की बेटियाँ अनवरत के पिछले दो अंकों में प्रकाशित हुआ। पहले अँक पर आठवीं टिप्पणी थी….. सच ने कहा …. एक प्रश्न है दिमाग में कल जब पोस्ट करें तो उसका उत्तर भी अगर दे सके तो आभार होगा। पूर्वा आप की पुत्री है, उसने स्त्री विमर्श …
Monthly Archive: August 2008
Aug 21
पब्लिक की मांग पर -रात की हसीना
पब्लिक की मांग पर -रात की हसीना Posted on August 21st, 2008 by alok रात की हसीना -फिल्म का पोस्टर था, नीचे लिखा था, पब्लिक की विशेष मांग पर, सेक्स और हिंसा से भरपूर। अपार भीड़। पब्लिक बहुत बदमाश हो गयी है। कैसी कैसी चीजों की मांग करती है। और फिर अपार भीड़। मैं इधर …
Aug 21
वेद प्रकाश की किताब : हिन्दी कम्प्यूटरी (6 – अंतिम किश्त)
पिछले अंक से जारी… हिंदी कंप्यूटरी सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकार वेद प्रकाश अध्याय 8 परिवर्धित देवनागरी और इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल– राष्ट्रीय एकता की और बढ़ता कदम हमारा देश एक है। हमारी सांस्कृतिक विरासत एक है। इस देश में बोले जाने वाली भिन्न-भिन्न भाषाओं के 50% से अधिक शब्द एक समान हैं। फिर भी यदि एक …
Aug 20
स्वतंत्रता के साथ बढ़ती असभ्यता
आज बात स्वतंत्रता की करूंगा, क्योंकि अभी हाल ही में हमने अपनी स्वतंत्रता के ६१ साल पूरे किए है। अपनी बात शुरू करता हूँ। …
Aug 20
गा के जियो तो गीत है जिंदगी…
“जीत के गीत” गाने वाले बिस्वजीत हैं, आवाज़ पर इस हफ्ते के उभरते सितारे. यह संयोग ही है कि उनका लघु नाम (nick name) भी जीत है, और जो पहला गीत उन्होंने गाया हिंद युग्म ले लिए, उसका भी शीर्षक “जीत” ही है. जैसा कि हम अपने हर फीचर्ड आर्टिस्ट से आग्रह करते हैं कि …
Aug 19
लोकगीतों में छत्तीसगढ की पारंपरिक नारी
छत्तीसगढ आरंभ से ही धान का कटोरा रहा है यहां महिलायें पुरूषों के साथ कंधे में कंधा मिलाते हुए कृषि कार्य करती रही हैं । कृषि कार्य महिला और पुरूष दोनों के सामूहिक श्रम से सफल होता है जिसके कारण हमेशा दोनों की स्थिति समान ही रही है, खेतों में दोनों के लिए अलग अलग …
Aug 19
१३ अगस्त – वीर शिरोमणी दुर्गादास राठौर जयंती अवसर पर विशेष
१३ अगस्त – वीर शिरोमणी दुर्गादास राठौर जयंती अवसर पर विशेष वीर शिरोमणी दुर्गादास राठौर जन्मभूमि की स्वतंत्रता के संघर्ष के अनुपम प्रतीक है. वे एक कुशल राजनीतिज्ञ संघटनकर्ता और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्य का बलिदान करने को तत्पर रहने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी थे. इतिहास के इस महानायक ने स्वाभिमान की रक्षा …
Aug 19
खास वर्ग के सुझाये मुद्दों से परे हटे बिना एकता संभव नहीं-आलेख
उस दिन अफलातून जी ने अंतर्जाल पर सीधे वार्तालाप के दौरान उन्होंने अपने शैशव ब्लाग का एक पाठ पढ़ने के लिये कहा। पाठ का शीर्षक था ‘भारतीय ‘जागृति’ बनाम पाकिस्तानी ‘बेदारी’ का राष्ट्र-प्रेम’। पाकिस्तान की फिल्म की ‘बेदारी का दर्द’ और भारतीय फिल्म ‘जाग्रति’ की न केवल कहानियां एक जैसीं हैं बल्कि उनके गाने भी …
Aug 18
राष्ट्र की एकताजी
राष्ट्र की एकताजी Posted on August 18th, 2008 by alok यह निबंध उस छात्र की कापी से लिया गया है, जिसने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में भाग लिया था। निबंध का विषय था-राष्ट्रीय एकता। निबंध के शीर्षक में दो शब्द हैं-राष्ट्रीय और एकता। एकताजी के बारे में सभी जानते हैं …
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