याद आए दुष्यंत – प्रेमचंद सहजवालादुष्यंत कुमारदेश में आपातकाल का समय था. सब जगह प्रतिबन्ध. गुरुदत्त जैसे वयोवृद्ध साहित्यकार जो लिखना छोड़ जीवन के अन्तिम दिन गिन रहे थे, न कानों में सुनने की शक्ति बची थी न आँखों में देखने की रौशनी. पर रात ढाई बजे अचानक पुलिस आती है और उन्हें गिरफ्तार करती …

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