Monthly Archive: August 2008

Aug
31

आदमी की पीर गूंगी ही सही गाती तो है..

याद आए दुष्यंत – प्रेमचंद सहजवालादुष्यंत कुमारदेश में आपातकाल का समय था. सब जगह प्रतिबन्ध. गुरुदत्त जैसे वयोवृद्ध साहित्यकार जो लिखना छोड़ जीवन के अन्तिम दिन गिन रहे थे, न कानों में सुनने की शक्ति बची थी न आँखों में देखने की रौशनी. पर रात ढाई बजे अचानक पुलिस आती है और उन्हें गिरफ्तार करती …

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Aug
28

रिश्ते और 24 कविताएँ

काव्य-पल्लवन सामूहिक कविता-लेखनविषय – रिश्तेविषय-चयन – HCअंक – सत्रहमाह – अगस्त २००८इस दुनिया की छोटी से छोटी ईकाई भी अपना पृथक अस्तित्व रखती है, लेकिन वहीं उसका ब्रह्माण्ड की शेष-सत्ता से विशिष्ट सम्बंध भी है। मनुष्य का जीवन भी इन्हीं विशिष्ट और विविध रिश्तों से पटा हुआ है। एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से सम्बन्ध …

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Aug
28

कविता वैसी कुछ खास चीज नहीं है ( एक नेपाली कविता )

रमेश श्रेष्ठ की नेपाली कविता ‘कविता-उत्सव’हिन्द-युग्म के अनुवादक (नेपाली से हिन्दी) कुमुद अधिकारी की व्यस्तता के कारण हम पिछले कई माहों से कोई नेपाली कविता नहीं प्रस्तुत कर सके। इंतज़ार काफी लम्बा हो गया था, लेकिन आज कुमुद अधिकारी एक नेपाली कविता ‘कविता उत्सव’ लेकर प्रस्तुत हैं जिसके रचनाकार है रमेश श्रेष्ठ।रमेश श्रेष्ठः एक परिचयपोखरा …

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