राम चन्द्र मिश्र का हिन्दी जाल स्थल वर्ड प्रेस के सहयोग से। Best Viewd in FireFox & Chrome Browsers
  • Jun
    17

    चिट्ठा चर्चा पर एक अर्जेन्ट पोस्ट डाली गयी है।

    और यहॉं हम सब ने मिलकर धुरविरोधी की हत्‍या कर दी- जब विरोध का दम घुटता है तो धुरविरोधी को मरना ही पड़ता है।

    उक्त पोस्ट पर मैने अपने टिप्पणी कर दी है, जिसका उत्तर भी मिल गया है। भावनाओं को एक हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया जा रहा है, तकनीक के साथ मिलाकर, इस भावुक बाढ़ मे शुक्ल जी का लैप-टॉप भी भीग चुका है :) .

    पहले धुरविरोधी ने कहा कि मुझे नारद से हट जाना चाहिये, ये लिखा और तकनीक के सहारे टिप्पणियाँ बन्द कर दीं, फ़िर एक और पोस्ट लिखी। शायद नारद को मेल लिख कर फ़ीड हटाने की सिफ़ारिश और साथ ही भावुक होकर चिट्ठा मिटाने की भी बात कह दी। फ़िर से तकनीक का सहारा लिया गया और उस प्रयोग को चिट्ठा-चर्चा पर आत्म-हत्या कहा गया,

    …………… चिट्ठे का पासवर्ड सिर्फ धुरविरोधी के पास था इसलिए वे खुद ही उसे मिटा सकते थे इसलिए इस अंत की जिम्‍मेदारी नारद, जितेंद्र या आपकी हमारी नहीं है- यह आत्‍महत्‍या है इसे हत्‍या कहना तकनीकी तौर पर गलत है। फिर वे उन दिक्‍कतों के विषय में बताएंगे जो किसी चिट्ठे के खुद हट जाने से एग्रीगेशन में होती हैं हालांकि धुरविरोधी को भी चिंता थी कि कहीं उनके चिट्ठे का शव जितेंद्र के नारद की एग्रीगेशन मिल में दिक्‍कतें पैदा न करे और इसके उपाय भी उन्‍होंने किए थे……………….

    बड़े नेक इन्सान थे हैं, भई।

    नीलिमा जी ने चिट्ठाचर्चा पर लिखा है,

    और हां मसिजीवी जी धुरविरोधी के जाने को आप ऎसे देखो कि वो आएगा फिर नई दस्तक देगा नए घोरविरोधी तेवरों के साथ क्योंकि विवश कर देगा उसे उसका यही तेवर क्योंकि ……दुनिया हर जगह एक सी है ! कहां जाएगा एक विरोधी मन आखिर विरोध भी जीवन का एक जरूरी शेड है ! पर बस अब बहुत हुआ आगे बढो भी ….

    आप भी देख सकते हैं धुरविरोधी आत्म हत्या (हत्या) करके भी अज़र-अमर है, पूरी रौनक के साथ वर्डप्रेस पर मौजूद है, तकनीक के सहारे। वहाँ पर आपको बताया जाता है कि

    Easy, tiger. This is a 404 page.

    हमने पहले भी कहा था, ब्लॉग डिलीट करना या पोस्टों को मिटाना दुर्भाग्य पूर्ण निर्णय होगा। जैसा कि ऊपर नीलिमा जी ने कहा है. तकनीक के सहारे धुरविरोधी फ़िर आयेगा, अपनी सारी पोस्ट और उन पर टिप्प्णियों के साथ, वैसे तो उसने अपना घर ध्वस्त नही किया है, इसलिये उसी घर मे भी आ सकता या किसी नये घर में भी।

    ये है तकनीक के सहारे धुरविरोधी की भावुकता। है न भावुक तकनीक :) .

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  • Jun
    17

    क्लिक और राइट क्लिक की ही तरह माउस के बीच वाले बटन ( Middle Mouse Button or Scroll Wheel) के दबाने को सेंटर क्लिक कहा जा सकता है, ये बटन, बाकी दोनो की तरह बटन न होकर स्क्रोल व्हील भी हो सकता है, नये आप्टिकल माउस इसी तरह के आते हैं। टैब्ड ब्राउजिंग के पहले इस बटन/व्हील (पहिये) का उपयोग मुख्यतः तेज और नियन्त्रित पेज स्क्रोल के लिये प्रयोग होता रहा।

    जब से टैब्ड ब्राउजिंग की सुविधा मिली है, इस बटन का उपयोग स्क्रोलिंग के अतिरिक्त, किसी लिंक को शीघ्र नये टैब मे खोलने और बन्द करने मे भी करता हूँ।

    नये टैब मे खोलने के लिये लिन्क पर सेंटर क्लिक करना Macintosh के long click जैसा आभास देता है, साथ ही गुगल टूलबार बताता है कि एक पॉप-अप ब्लॉक किया गया। किसी टैब को बन्द करने के लिये उस टैब के कोने तक माउस प्वाइन्टर ले जाने की जरूरत नही, एक से अधिक टैब खुले होने पर किसी टैब के शीर्षक क्षेत्र मे कहीं भी सेंटर क्लिक करके उसको तुरन्त बन्द कर सकते हैं।

    मुझे तो सेंटर क्लिक (Middle Mouse Button Click) ब्राउजिंग के दौरान काफ़ी सुविधाजनक लगता है।

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  • Jun
    17

    नारद को किसी ब्लॉग को बिना किसी पूर्वसूचना या व्याख्या के हटाने का अधिकार है। क्योंकि नारद मात्र एक Feed Aggregator  है,  और लोगों को भ्रम है नारद मे लोकतन्त्र का।

    नारद [नारद. अक्षरग्राम.कॉम] के प्रति लोगों का अविश्वास, दोषारोपण आदि हास्यास्पद है। क्योंकि नारद एक फ़ीड संकलक है। ये भी एक भ्रम है, यहाँ तक कि, इस सवाल पर कि, एक वाक्य मे नारद का उद्देश्य क्या है? नारद की ओर से एक जिम्मेदार प्रवक्ता ने नारद को मात्र एक संकलक बताया। पर मुझे ऐसा नही लगता।

    नारद के प्रति अभिव्यक्ति की स्वन्त्रता की दुहाई देना, मौलिक अधिकारों आदि की बात करना भी मूर्खता है, क्योंकि नारद लोक-तन्त्र नही है। नारद पर लोकतन्त्र नही हो सकता है।

    और भी फ़ीड संकलक हैं, अब नारद ही पर इतना विवाद क्यों:

    मात्र इसलिये कि नारद पॉपुलर है नारद के पास एक अदृश्य शक्ति है, सब उसका उपयोग करना चाहते हैं, निजी स्वार्थों तक के लिये, जैसा कि मै भी करता हूँ। इसलिये कि नारद हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये बना है। नारद पर आने के लिये मामूली सी शर्त ये कि आप हिन्दी मे लिखते हैं। आपने एक बार पञ्जीकृत होने के बाद, इसका महत्त्व समझ लिया। एक हिन्दी ब्लॉगर को एक सम्पूर्ण समुदाय मिल गया। अब उसको जो अच्छा लगा, लिखना शुरू कर दिया, उत्साह पूर्वक, क्योकि पता है कि लिखने के बाद कुछ सौ लोगों की निगाह तो उस पर (कम से कम शीर्षक पर) पड़ेगी ही (वास्तव मे ऐसा हो या न हो)।

    नारद पर लिखा है

    नारद पर आपका स्वागत है। नारद आवाज है हिन्दी चिट्टों की। हिन्दी चिट्ठों को देखने का एकमात्र स्थान। नारद आपका अपना वैब स्थल है, इसे बनाने और सजाने संवारने के लिये आपके सुझावों और आलोचनाओं का हार्दिक स्वागत है।

    यह सत्य नही है, क्यों कि इस मे व्याकरण, भाषा एवं तथ्य की गलतियाँ हैं। ये नारद के पृष्ठ से जुड़े लोगों का अपना मामला है, मुझे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता इसलिये मैं विरोध नही करता,  HindiBlogs.Com  को विरोध करने का अधिकार है, क्योकि वह एक व्यावसायिक स्थल (जैसा) है, शायद अभी तक नही किया गया इसलिये कि नारद अव्यावसायिक है लेकिन इसके अतिरिक्त भी कुछ कारण अवश्य हैं।  फ़िर भी बहुत से लोग इस झाँसे मे आ ही जाते हैं कि नारद ऐसा एक मात्र स्थान है :)

    अभी अभी एक पोस्ट आयी है

    नारद अब जर्मनी बन गया है और उसे लोग तानाशाह। कल को मैं भी कुछ लिखूंगा और नारद जी मुझे भी बाहर कर देंगे। मैं नारद के कारण नही हूँ और न ही मुझे नारद के कारण समझा जाय। नारद के लोग जो चाहे मन मानी करें लेकिन मुझे बख्श दें । नारद जी , मुझे भी आप माफ़ ही करें। मैं भी आपके निर्णय से असहमत हूँ। विरोध स्वरूप मेरा चिठ्ठा भी आप अपने यहाँ से बाहर कर दें।

    तानाशाह अब बन गया है, इसका मतलब पहले नही था, मतलब पहले लोकतन्त्र था नारद मे(?)।

    मैं यहाँ सेंसर शिप लगवाने नही आया। जो मन करेगा लिखूंगा और नही मन करेगा तो नही लिखूंगा। आख़िर चिठ्ठा किसी की निजी सम्पत्ति होती है और उसमे हस्तक्षेप का अधिकार नारद क्या ब्रम्हा को भी नही दिया जा सकता ।

    हास्यास्पद! क्या नारद सेंसरशिप लगा सकता है? किसी के मन को कुछ लिखने से रोक सकता है, या हस्तक्षेप कर सकता है? चिट्ठा निजी सम्पत्ति है, ये सही कहा है।

    जब हम या आप अपने चिट्ठे पर नारद के प्रति कुछ भी लिखने से पहले, उसके पीछे के व्यक्ति के बारे मे नही सोचते तो नारद मुनि के ऐसा संदेश लिखने पर क्यो आहत महसूस करते हैं?

    Narad Muni said…
    यदि आप अपना ब्लॉग नारद से हटवाना चाहते है, तो इत्ती बड़ी पोस्ट लिखने की आवश्यकता नही थी, बस एक इमेल लिख देते, कि आपके ब्लॉग को नारद से हटा दिया जाए।

    पता नही क्यों पहले या कभी भी या अब भी, लोग न

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