Saturday, December 23, 2006

तस्वीरें: क्रिसमस २००६ के उपलक्ष्य मे आयोजित भोज से

हर सम्भव स्थान पर आपके स्वागत के लिये तत्पर बुब्बो नताले।

पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी इस सप्ताह मे क्रिसमस के उपहारों के चुनाव और लेन देन की प्रक्रिया अपने चरम पर थी!

और आज (२१ दिसम्बर) हमारी Boss जो कि विश्वविद्यालय की उप-कुलपति भी हैं ने हम सबको रात्रि भोज पर आमन्त्रित किया।

हम सब की तरफ़ से जो उपहार प्रो. क्रिस्ताल्ली को भिजवाया गया उसकी छायाप्रति देखते....

 

ऊपर की तस्वीर मे केन्द्र मे हैं प्रो. ग्लोरिया क्रिस्ताल्ली (उप-कुलपति कामेरिनो विश्विद्यालय)। आते ही सबसे पहले उन्होने हम सब को उपहार बांटे।

 'सावरो' और 'स्तेफ़नो' शायद अपने उपहारों के बारे मे...

 

और ये Mr. n Mrs. Dal Ben

 

सिन्योरिना 'आगता'  (ऊपर, १६ के समूह मे सबसे छोटी) को निहार रहे हैं।

 

 

डॉ जान्नी सग्रातिनी बहुत खुश लग रहे हैं

 

हमारी प्लेट मे रखा ये  विशिष्ट 'पास्ता' (रावियोली) मुझे गुझिया की याद दिला गया।

 

कुछ गम्भीर वार्तालाप भी...

 

मुझे नींद आने लगी थी...और 'धूलदेव' मुस्कुरा रहे थे...

 

इसलिये, बहुत हो चुका (सिन्योरा 'मिकेला') अब बस...!

मिलते हैं नये वर्ष मे..नयी उमंग और नयी तरंग के साथ!

 

नोट: सिन्योर:श्रीमान ।

सिन्योरा: श्रीमती ।

सिन्योरिना: सुश्री ।

Monday, December 18, 2006

गोत्र: क्या, क्यों एवं कैसे

ब्राह्मणों के विवाह में गौत्र-प्रवर का बड़ा महत्व है। पुराणों व स्मृति ग्रंथों में बताया गया है कि यदि कोई कन्या संगौत्र हो, किंतु सप्रवर न हो अथवा सप्रवर हो किंतु संगौत्र न हो, तो ऐसी कन्या के विवाह को अनुमति नहीं दी जाना चाहिए।

विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप- इन सप्तऋषियों और आठवें ऋषि अगस्ति की संतान 'गौत्र" कहलाती है। यानी जिस व्यक्ति का गौत्र भारद्वाज है, उसके पूर्वज ऋषि भारद्वाज थे और वह व्यक्ति इस ऋषि का वंशज है। आगे चलकर गौत्र का संबंध धार्मिक परंपरा से जुड़ गया और विवाह करते समय इसका उपयोग किया जाने लगा।

ऋषियों की संख्या लाख-करोड़ होने के कारण गौत्रों की संख्या भी लाख-करोड़ मानी जाती है, परंतु सामान्यत: आठ ऋषियों के नाम पर मूल आठ गौत्र ऋषि माने जाते हैं, जिनके वंश के पुरुषों के नाम पर अन्य गौत्र बनाए गए। 'महाभारत" के शांतिपर्व (297/17-18) में मूल चार गौत्र बताए गए हैं- अंगिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु, जबकि जैन ग्रंथों में 7 गौत्रों का उल्लेख है- कश्यप, गौतम, वत्स्य, कुत्स, कौशिक, मंडव्य और वशिष्ठ। इनमें हर एक के अलग-अलग भेद बताए गए हैं- जैसे कौशिक-कौशिक कात्यायन, दर्भ कात्यायन, वल्कलिन, पाक्षिण, लोधाक्ष, लोहितायन (दिव्यावदन-331-12,14)  विवाह निश्चित करते समय गौत्र के साथ-साथ प्रवर का भी ख्याल रखना जरूरी है। प्रवर भी प्राचीन ऋषियों के नाम है तथापि अंतर यह है कि गौत्र का संबंध रक्त से है, जबकि प्रवर से आध्यात्मिक संबंध है। प्रवर की गणना गौत्रों के अंतर्गत की जाने से जाति से संगौत्र बहिर्विवाहकी धारणा प्रवरों के लिए भी लागू होने लगी।

 वर-वधू का एक वर्ष होते हुए भी उनके भिन्न-भिन्न गौत्र और प्रवर होना आवश्यक है (मनुस्मृति- 3/5)। मत्स्यपुराण (4/2) में ब्राह्मण के साथ संगौत्रीय शतरूपा के विवाह पर आश्चर्य और खेद प्रकट किया गया है। गौतमधर्म सूत्र (4/2) में भी असमान प्रवर विवाह का निर्देश दिया गया है। (असमान प्रवरैर्विगत) आपस्तम्ब धर्मसूत्र कहता है- 'संगौत्राय दुहितरेव प्रयच्छेत्" (समान गौत्र के पुरुष को कन्या नहीं देना चाहिए)।

मेरा गोत्र गौतम है :) ।

साभार

एम एस एन भारत

Tuesday, December 12, 2006

इराकी मेहमान से एक मुलाकात

आज सुबह लैब में इराक से एक मेहमान आयीं।

 'जान्नी रफ़ैयानी' ने परिचय कराया उस समय वहाँ मै, धूलदेव और अन्ना थे, पहले उन्होंने हमारे बारे मे पूछा फ़िर अपने बारे मे बताया।

वे इराक के तिकरित शहर के विज्ञान महाविद्यालय की संकायाध्यक्ष थीं।

 

 हमने बताया कि हम लोग मूलतः संश्लेषिक रसायन पर कार्य करते हैं, वे  थोडा़ आगे बढीं, देखा Rotatory Evaporator पर आसवन हो रहा था तो उनकी प्रतिक्रिया थी:

 अच्छा! तो आप लोग पकाते रहते हैं (शायद इसलिये क्योंकि वे स्वयं वैश्लेषिक रसायनज्ञ थीं, ये कुछ देर बाद पता चला)।

 थोडा़ और आगे....एक बडे़ फ़्लास्क पर उनकी नज़र पडी..तो ये आयोडीन है..

मैने कहा नहीं ये अम्ल-राज (Aqua Regia) है कुछ दिन पहले बनाया था, आयोडीन उधर जार मे रखा है।

अच्छा! तो आप क्या बनाते हैं?

मैने बताया मुख्यतः Nucleosides और Nucleotides।

बोलीं "ठीक है, हमारे यहाँ भारत से जो पैरासिटामॉल आयी थीं उनमे कुछ था ही नही..मैने खुद चेक किया। भारत मे दवाइयाँ अच्छी नहीं बनतीं।"

हमने कहा ये कैसे हो सकता है..कुछ कैसे नही होगा..ये कैसे कह सकती हैं

आप? क्या पाया आपने?

मैने खुद Analyze किया...IR..Spectrum और...सब टैब्लेट्स २-३ महीनों में ही काली पड़ गयी थीं।

आपको उस समय Analyse करना चाहिये था जब वो सही हालत मे थीं शायद आपने Expired Tablets Analyze की थीं।

नहीं नहीं वहाँ इटली और यू.के. की भी पॉरासिटामॉल थीं जो बहुत दिनोतक काली नहीं पड़ीं।

किस Pharma की थीं...?

बोलीं मुझे याद नही लेकिन भारत की ही थीं जो खराब पायीं गयी थीं। 'धूलदेव' ने फ़िर कहा नही ऐसा नही हो सकता।

जान्नी बोले हो सकता है कुछ इराक के Petroleum का असर हो गया होगा।

लेकिन आप लोगों को क्या पारासिटामॉल की बहुत जरूरत पड़ती है?
बोलीं.. और नही तो क्या..

उन्होने हथेली से मात्रा का अनुमान बताते हुये कहा हम लोग रोज इतनी इतनी-इतनी दवाइयाँ खाते हैं।

लेकिन क्यों?

आपको पता नही है? वहाँ हालात कितने खराब हैं...

हाँ..आपका घर तिकरित मे है..वहाँ तो बहुत ही खराब हाल हैं..


नहीं बगदाद मे हमारा घर है..रोज तिकरित जाना होता है। वहाँ तो कौन जाने कब क्या हो जाये, हम तो जब से बाहर आये है, सुबह, दोपहर, शाम फोन करके खैरियत ही पूछते रहते हैं।

मैने पूछा आपको क्या लगता है, कौन कर रहा है ये सब,

किसी को नही पता...सुन्नी हैं शिया हैं शिया मे भी...

भारत मे तो बहुत शान्ति रहती है न,

मै क्या कहता मैने कह दिया बहुत शान्ति तो नही लेकिन बहुत सारे लोग जानते हैं कि शान्ति भंग कौन लोग करते हैं।

जाते जाते एक बार फ़िर.... भारत की पारासिटामॉल एक दम बेकार है,उम्मीद है आप लोग भारत के लिये भविष्य में अच्छी दवाइयाँ बनायेंगे।

मैने कहा आपको पूरा यकीन है वे टैब्लेट्स भारत से ही आयी थीं...कहीं और से तो नहीं..

नही नहीं भारत की ही थीं।

हो सकता है कि पाकिस्तान या बांग्लादेश से गयी हों!

पाकिस्तान का नाम आते ही उनके चेहरे पर कुछ अजीब से भाव आये..बोलने लगीं हमने बहुत से युद्ध झेले हैं पहले इरान से फ़िर अमेरिका से और अभी भी..

जान्नी बोले:- या फ़िर चाइना से....आपको शायद मालूम नही भारत की

'सिल्डेनाफ़िल' बहुत अच्छी होती है।

ये क्या है? उन्होने पूछा।

आपको सिल्डेनाफ़िल नही पता?

जान्नी ने बताना शुरू किया.... अपनी इटालियन अंग्रेजी मे काफ़ी कोशिश की लेकिन उनको नहीं समझा पाये।

हम लोग अपने काम मे फ़िर रम गए थे, उनको और भी प्रयोगशालायें देखनी थीं तो....... ये थी इराकी मेहमान की दास्तां।

आप तो जानते हैं न सिल्डेनाफ़िल !

अगर नही तो अब जान लीजिए।

Friday, December 08, 2006

आज ऐसा हुआ!

 

 स्वाचालित नवीनीकरण अनुमत है इसलिये...

 

 

मुझे नहीं पता था कि इसके बिना अब ये Programme नही चला सकते।

 

 

 

जिज्ञासा: भारत मे Win Xp Pro का मूल्य क्या है?

 

Tuesday, December 05, 2006

एक अकेला

सन्तरा!








मुझे तो लगता है फ़ोटो अच्छी आयी है :-) ।

Monday, December 04, 2006

परदेश के देश मे दो और देश।

इस प्रविष्टि मे गुगल मानचित्रों को Embed (हिन्दी?) किया गया है, जिन्हे प्रदर्शित होने के लिये ActiveX controls को स्वीकृत होना होगा और मानचित्र प्रकट होने मे थोडा़ सा समय लग सकता है

मानचित्र का प्रकार परिवर्तित और Zoom घटाया-बढ़ाया जा सकता है।

"हम तो हैं परदेश मे, देश मे निकला होगा चाँद..." जगजीत सिंह द्वारा गायी गयी एक प्रसिद्ध गज़ल है। मुझे गजलों का शौक नही है फ़िर भी..'देश मे निकला होगा चाँद' वाक्य जैसे दिल मे घर कर गया है। कारण कि जब हम पीएच डी के लिये प्रतिदिन (सोमवार से रविवार) अपने संस्थान को प्रस्थान करते थे तो एक बडा़ सा बोर्ड रास्ते मे मिलता था जिसपे बडे़ बडे़ अक्षरों मे ये वाक्य लिखा होता था (एक धारावाहिक का विज्ञापन), जिसे देखकर कुछ अलग प्रकार की अनुभूति होती थी।

उसके कुछ सालों बाद पता चला कि ये देश किसी देश के अन्दर है, और वो भी उसकी राजधानी के। तो ये तो हुआ परदेश के देश में एक देश। मै रोम ३-४ बार गया हूँ और दो बार इस देश मे भी जाने का मौका मिला। वहाँ कुछ चीजें जरूर दिखीं जिससे आपको आभास हो कि वेटिकन का रोम मे एक अलग 'देश' रूपी स्थान है जिनमे से दो जो मुझे प्रमुख लगीं वो यहाँ चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ।

ये वहाँ का डाक घर जो सॅन पियेत्रो परिसर मे ही था

और ये वेटिकन का स्विस गार्ड, इनके बारे मे अधिक जानकारी के लिये देश-दुनिया पर पढे़।

साथ ही संलग्न गुगल मानचित्र से आप वेटिकन के उस स्थान का आकाशीय दृश्य देख सकते हैं जहाँ पर पोप का भाषण सुनने के लिये लोग देश विदेश से एकत्र होते हैं।

इस स्थान को 'पियात्सा सॅन पियेत्रो' नाम से जाना जाता है।

पिछले वर्ष जब मै वियना से रोम आ रहा था तब जहाज की खिड़की से इस का बहुत खूबसूरत दृश्य दिखायी दिया था,लेकिन चूंकि विमान उतरने वाला था इसलिये मैं निर्देशानुसार कैमरा अन्दर रखा चुका था।

गुगल अर्थ से इस स्थान की भव्यता का अच्छा अनुभव किया जा सकता है। शुरू के embedded map में Zoom out करके आप रोम के अन्दर इस देश की सीमायें भी देख सकते हैं।

यदि आपके कम्प्यूटर पर गुगल अर्थ इन्स्टाल है तो आप इस Piazza San Pietro पियात्सा़ सॅन पियेत्रो Placemark पर क्लिक करके वहाँ पहुंच सकते हैं।

मुझे पिछले महीने तक नही मालूम था कि ऐसा ही एक और देश भी है, इटली मे। अक्सर जब मै गुगल अर्थ से इटली के पूर्व-उत्तर की ओर बढ़ता तो एक चिन्ह उभरता, सॅन मरीनो नाम से, चूंकि यहाँ सॅन से प्रारम्भ होने वाले स्थानो के नाम बहुतायत से पाये जाते हैं तो मैने कुछ विषेश ध्यान नही दिया।

एक दिन अपने इटालियन साथियों से चर्चा के दौरान सॅन मरीनो का जिक्र किया तो उन्होने मुझसे पहले यही पूछा कि मै वहाँ गया था क्या?, और तभी पता चला के ये है इतालिया की सीमाओं के अन्दर (२० क्षेत्रों मे विभाजित इटली के एमिलिया-रोमान्या' और 'मार्के' क्षेत्रों की सीमा पर) स्थित एक और देश 'रिपुब्लिका दि सॅन मरीनो'। यह 'वेटिकन-सिटी' और 'मोनॉको' के बाद यूरोप का तीसरा सबसे छोटा देश है, एवं पूरा देश ९ नगर पालिकाओं मे विभाजित है।

यहाँ दुनिया का सबसे पुरातन कार्यशील संवैधानिक प्रजातन्त्र स्थापित है।

इसके बारे मे अधिक और अन्य यूरोपीय सूक्ष्म राज्यों के बारे मे जानकारी यहाँ से भी प्राप्त कर सकते हैं। जो बात महत्त्व पूर्ण है यहाँ (इटली) के लोगों के लिये वो ये कि, अगर आपको सिक्के एकत्र करने, विभिन्न प्रकार की Wine Taste करने का और इलेक्ट्रानिक उत्पादों का शौक है तो आप को एक बार सॅन मरीनो अवश्य जाना चाहिये।

मैने तो योजना बना ली है!

नीचे 'सॅन मरीनो' की संसद (वृहत-लोक-परिषद) की कड़ी दी गयी है। http://www.consigliograndeegenerale.sm/

यहाँ की भाषा इटालियन ही है, मुद्रा यूरो (लेकिन संशोधित सिक्के) है, परन्तु ये यूरोपियन यूनियन का हिस्सा नही है।