Saturday, August 26, 2006
IBNLive : College polls cancelled, students beat prof to death
IBNLive : College polls cancelled, students beat prof to death
Monday, August 21, 2006
Blogger beta Released::ब्लागर बीटा संस्करण जारी।
पिछले सप्ताह (१४ अगस्त) को ब्लागर ने अपना नया बीटा संस्करण जारी कर दिया है। जो बहुत सी नवीनतम सुविधाओं से युक्त है। जैसे कि...
- आप अपनी प्रविष्टियों को tagged कर सकते हैं, जो कि श्रेणियाँ बनाने से भी बेहतर है। (जैसे मैने जीतू भाई के ब्लाग पर देखा कि श्रेणियाँ तो बहुत हैं पर उनमें प्रविष्टियाँ इक्का दुक्का ही हैं)
- आप ये निर्धारित कर सकते हैं कि कौन आपका ब्लाग पढे और किससे छुपाकर आप ब्लागिंग करते रहें।
- बहुत सी नयी Themes उपलब्ध हैं, जिनकी Colour Scheme आप केवल माउस के प्रयोग से बदल सकते हैं।
- समय के साथ सभी को यह सुविधा उपलब्ध हो जायेगी।
- अपने गुगल एकाउंट से नया खाता बीटा पर खोलकर पुराने ब्लागर खाते की सभी प्रविष्टियों को नये खाते के साथ मिला सकते हैं।
अगर आप अभी के अभी नया बीटा संस्करण प्रयोग करना चाहते हैं तो कोई नया खाता खोलने की भी आवश्यकता नही है, यदि आपके पास गुगल खाता है तो।
और फ़िर जल्दी ही इसी खाते से आप अपने पुराने खाते को मिला सकते हैं।
A new version of Blogger in beta! has been launched! Everyone was looking for ways to do more with their blog, and now they can with this new release. With the beta its possible to:
1. Categorize your posts with labels
2. Control who can read your blog
3. Change the appearance and content of your blog with your mouse instead of HTML
Take a look at the tour to see all the new things that can be done (well, a lot of the new things ... they didn't all fit in the tour).
As this version is released, the number of people who can switch over is limited. (You'll see a link on your Blogger dashboard when you are able to move.) Eventually, of course, everyone will be able to transition their blogs to the new version.
If you can't wait, you can create a new account on the beta now and make a new blog to test out the new features. Because the new Blogger uses Google Accounts, you can use your existing Google login, or create a new one. (Later, you'll be able to merge your current and beta accounts, and have all your blogs in one place.)
Monday, August 14, 2006
Jay-Hind::बोलो मेरे संग "जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द..."
तब तक के लिये,
बोलो मेरे संग "जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द...
http://xoomer.alice.it/mishra.rc/Jay%20Hind.mp3
Monday, August 07, 2006
वर्ड प्रेस पर टिप्पणी
एक और बात, वर्ड प्रेस पर तो टिप्पणियोँ को ब्लागर द्वारा संशोधित करने का भी प्रावधान है।
मेरे विचार से मेरी टिप्पणियोँ को Akismet द्वारा स्पाम बताने का कारण वेब साइट फ़ील्ड मे दिया गया पता है, जो कि इस प्रकार है।
http://www.blogger.com/profile/14890442
इससे Akismet की Spam प्रतिरोधक क्षमता पर संशय होता है।
Thursday, August 03, 2006
Tuesday, August 01, 2006
सपने सच होते हैं!
लगभग दो मास के अन्तराल के बाद मै आपके समक्ष उपस्थित हूं, इस बीच मैने दो हिन्दी चिट्ठाकार सम्मेलनों मे भी भाग लिया,
जिसकी खबर आप सब तक साथी ब्लागर्स द्वारा पहुँचायी जा चुकी है,
इन्ही दिनों मैने अपनी भारत यात्रा भी सम्पन्न की, भारत जाने के पहले मैने इटली के एक और विख्यात शहर जेनोवा का भी दर्शन किया, ये वही शहर है जहाँ से कोलम्बस भारत पहुचने के लिये चला था और मध्य अमेरिका के द्वीपों में जाकर खो गया। फ़िलहाल भारत यात्रा सुखद और शान्तिपूर्ण सम्पन्न हुई।
भारत से आने के बाद ये मेरा पहला साप्ताहिक अवकाश था तो मै अपनी दराजों की तलाशी ले रहा था तभी मुझे एक हस्त लिखित प्रति मिल गयी एक यात्रा विवरण की, ये तब की बत है जब मैने (दिसम्बर २००५), कम्प्यूटर पर हिन्दी लिखना सीखा ही था। उन दिनों UNICAM मे ३ मास के संक्षिप्त वैज्ञानिक प्रवास पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्व-विद्यालय से वहाँ के सबसे नवयुवक प्रो. सरताज तबस्सुम आये हुए थे।
प्रस्तुत आलेख उन्ही के शब्दों में है।
सपने सच होते हैं
प्रातः काल ६ बजे हम वेनिस (इटली) के रेलवे स्टेशन पर उतरे, सूरज के किरणों की प्रतीक्षा मे हम बाहर निकले..सर्दी बहुत थी, परन्तु बाहर जाकर देखा तो बारिश भी हो रही थी।
प्लेट्फ़ार्म के बाहर न तो सडक थी और न ही मोटर गाडी, बस एक समन्दर की धारा और उसमें चलते स्टीमर........
आँखे जैसे पलक मारने को तैयार ही नही थीं और उन्हें यकीन ही नही हो रहा था कि किसी शहर की सारी सड़कों और गलियों में आवागमन पानी पर होता है। आज जब यह सपना सच हुआ तो खुद को विश्वास ही नहीं हुआ।
बात बहुत पुरानी है और यह सपना भी बहुत पुराना है, अब से बीस साल पहले मैं अपने ग्यारहवीं कक्षा मे बैठा था और मेरे अन्ग्रेजी के अध्यापक एक कहानी सुना रहे थे "The Merchant of Venice" मैने उसे बहुत ध्यान से सुना बाद मे उस पूरे उपन्यास को बहुत बार पढा़, उस किताब मे वेनिस के पूर्ण विवरण और व्यापार की कहानी थी जैसे गलियों रास्तों मे नावो का चलना, समुद्र की धारा मे स्टीमर से व्यापार होना, तथा लोगों का एक दूसरे के यहाँ जाना, सब कुछ नावों के द्वारा होता।
किताब पढने के बाद मेरी आँखों ने एक सपना देखा कि काश मैं इस शहर को देखता कि क्या यह सच है, एक लम्बा समय गुजर गया और एक दिन मुझे भारत सरकार ने शोध कार्य के लिये इटली भेज दिया, और एक शनिवार को अपनी वेनिस यात्रा शुरू की, हम इटले के एक छोटे से शहर कामेरिनो से वेनिस के लिये रवाना हुए, रात्रि के ९ बजे हमने यात्रा प्रारम्भ की और प्रातः ६ बजे वेनिस पहुँचे।
बारिश तेज थी परन्तु ज्यों ही हम स्टीमर की ओर बढे़ और हमने वेनिस के अति सुन्दर केन्द्रीय स्थल के लिये टिकट लिया,
तब हमे टिकट देने वाले ने बताया कि पानी बहुत है इसलिये आपको पानी वाले जूते लेने होंगें,
मैने आश्चर्य से पूछा कि क्यों तो बताया कि पूरे शहर मे बहुत पानी है और आप इन जूतों के बगैर शहर मे प्रवेश नही कर सकते, नही तो आपके कपाडे़ भीग जायेगे।
वहाँ दो प्रकार के जूते बिक रहे थे, एक रबड़ के, जो सच मे जूते थे उनकी कीमत २५ यूरो थी
और एक लम्बा पालीथीन जैसा कवर जिसकी कीमत १० यूरो मात्र थी।
सारे पर्यटक जूते खरीद रहे थे और पैरों पर रंग बिरंगे जूते चढाये हुए लोग स्टीमर की ओर चले,
स्टीमर का टिकट मात्र ५ यूरो का था और हम अपने सपने के पहले चरण में प्रवेश कर रहे थे,
स्टीमर ने चलना शुरू किया
और वेनिस नज़र आने लगा,
उसकी सुन्दरता तो जैसे बढते ही जा रहे थी, हर पल नया नज़ारा, हर पल अति सुन्दर होता जा रहा था। ऐसा लगता था जैसे य्ह शहर न होकर जल परी पानी पर उतरी है, और सबका मन मोह रही है...मेरा सपना सच हो गया था और मैं बहुत प्रसन्न था।
हम लोग ज्यों ही नीचे उतरे रास्ता पानी से भरा था जो लोग
हर गली इतनी सुन्दर,
दुकानें सजी हुई, हम एक गली से दूसरी गली जाते रहे परन्तु वेनिस इतना बडा़ शहर कि स्माप्त होने मे नही आ रहा था,
हर दृश्य इतना सुन्दर कि तस्वीरे
खीँचते खीँचते आदमी थक जाये,
हमने बहुत सुन्दर दृश्य अपने कैमरे मे कैद कर लिये,
यहाँ का सेन्टर या "चेन्त्रो" जो San Marco के नाम से जाना जाता है,
समुद्र तट के किनारे स्थित है, अति सुन्दर है..बीच में एक ऊँचा टावर और चारों और
भव्य इमारत जिसमें मन मोहक दुकानें,
इतना सुन्दर दृश्य और बीच मे समुद्र का जल..मेरे पास तो इसकी सुन्दरता के वर्णन के लिये शब्द नही रह गये ऐसा लग रहा था कि यह शहर भी सपना ही है।
सुन्दर सुन्दर मकान पुल गलियाँ और दुकानें, व्यापार मन्डल के कार्यालय सब पानी से जुड़े थे,
और लोग अपने काम पर सीद्गे सादे तरीके से आ जा रहे थे,
जब जब मै ये सोचता कि ये कैसे सम्भव है कि हर दुकान हर घर पानी
मे तो विश्वास को सत्य का सहारा मिलते हुए भी आश्चर्य सा लग रहा था।
अन्त मे मैं ईश्वर को धन्यवाद देते हुए और अपने सपने को सच देखते हुए वेनिस से वापस कैमेरिनो की ओर चल दिया।
प्रो. सरताज तबस्सुम
रसायन विज्ञान विभाग
अलीगढ़ मुस्लिम विश्व-विद्यालय
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
भारत॥