राम चन्द्र मिश्र का हिन्दी जाल स्थल

वर्ड प्रेस के सहयोग से। Best Viewd in FireFox & Chrome Browsers

  • Feb
    9

    It may take a while to load the Live stream, please be patient, Thanks!

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  • Feb
    8

    India has already lost 3 wickets…let’s see if they can play for the whole day …

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  • Feb
    5
    The Coat of arms of South Africa

    Image via Wikipedia

    The first test of the 2 Match Test Series between India and South Africa is begining on Sarurday morning at Nagpur, India.

    February 6-10, 2010
    Start time 0930 (0400 GMT)

    The results of this series would be helpful in deciding the No. 1 test team. Currently India is already ahead of South Africa with 4359 points and a Rating of 125. Australia has slipped to 3rd place, however it has 4586 point and a Rating of 118.

    Let’s wait for the game to begin and see…how India tackles SA at their homegrounds.

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  • Feb
    5

    इस बार, पहले तो सोचा था कि दिवाली घर पर मनायेंगे, इसलिये १५ अक्टूबर को रिटर्न टिकट लिया था। पर परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनीं कि चेन्ज कराना पड़ा और २३ नवम्बर की टिकट ले ली गयी। अमेरिका आये हुये अभी हमको ८-९ महीने ही हुये थे। शाम को ६ बजे की   Lufthansa  की फ़्लाइट थी। Lenox  से एयर पोर्ट के लिये सीधी ट्रेन मिलती है तो हम साढ़े तीन बजे तक वहाँ पहुंच चुके थे।

    Atlanta, AirPort

    इस बीच समय काफ़ी था तो कुछ तस्वीरें भी लीं, अभी तो ऐयर पोर्ट के बाहर की तस्वीरें देखिये।

    Atlanta, AirPort

    Atlanta, AirPort

    ऊपर के दोनों चित्रो मे टैक्सी॒न्ग करते हुये जहाज देखे जा सकते हैं।

    Atlanta, AirPort

    Atlanta, AirPort

    अन्दर जाकर पहले लुफ़्तहान्सा की डेस्क से अपना सामान चेक्ड इन किया बोर्डिन्ग पास लेकर सिक्योरिटी के लिये जाने से पहले थोड़ी देर एयर पोर्ट का जायजा लिया। कुछ और तस्वीरें अगली पोस्ट में।

    राम चन्द्र मिश्र।

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  • Feb
    3

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  • Feb
    2

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  • Feb
    1

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  • Jan
    31

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  • Aug
    25

    पिछले रविवार अचनाक मन्दिर जाने का प्रोग्राम बन गया। सुबह तो टाइम से उठ गये थे लेकिन निकलते निकलते २ बज गये। जहाँ हम जा रहे थे हिन्दू टेम्पल, नाम कुछ अजीब लगा अब मन्दिर तो हिन्दुओं का ही होता है, शायद इसलिये। तो ये हिन्दू टेम्पल अटलांटा से लगभग १३.३ मील (~22.2 कि मी) है।

    DSC08474

    अभी तक हम बे-कार ही हैं इसलिये वाया एयरपोर्ट जाना हुआ, वैसे तो एयर पोर्ट गये भी काफ़ी दिन हो गये थे, तो अच्छा ही लगा उधर जाकर।

    DSC08508

    पहले ट्रेन से गये एयर पोर्ट तक फ़िर वहां से बस ली गयी, हम तीन लोग थे, ’वसन्त राज’ और ’कृष्णा’ के साथ।

    DSC08501

    पहुंचने से पहले तक मन्दिर के बारे मे नही सोचा था कि कैसा होगा, क्योकि गया भी बहुत कम मन्दिरों मे हूँ, तो पहुंचने पर पता लगा कि ये दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला मे बना मन्दिर है।

    DSC08488

    फ़िर तो भगवान भी, बहुत से जिनके कि नाम याद रखना भी मुश्किल है, घर मे पूछा गया तो बस एक ही बता पाये।

    DSC08492

    DSC08494

    खूब सारे देवताओं के दर्शन किये फोटो न ले पाये, यूरोप के विपरीत यहाँ भी भारत के तरह तस्वीरें लेना वर्जित है, जब कि पन्डित जी आरती स्पांसरिन्ग के लिये परिसर मे ही आवाज लगा रहे थे।

    DSC08497DSC08496

    प्रसाद वितरण हुआ ही नही, भूख लग गयी थी तो बेसमेन्ट मे  एक रेस्टॉरेन्ट भी उपलब्ध था वहाँ पोन्गल उपमा और कर्ड राइस तथा टामेरिन्ड राइस की व्यवस्था थी। भगवान की पूजा के बाद पेट पूजा की और वापस चल दिये अटलांटा की ओर। लिखने को ज्यादा कुछ है नही, आप लोग तस्वीरें ही देखते जाइये :)

    Atlanta

    Atlanta

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  • Jul
    22

    संजय राणा हमारे भारत के एक जागरुक नागरिक हैं और उन्होने अपने निम्न विचार इस साइट पर व्यक्त किये थे, जिसको परिमार्जित कर यहाँ पर प्रकाशित किया जा रहा है।

    पता नहीं मेरे देश की सरकार को क्या हो गया है, कसाब ओर उनके मरे हुवे आतंकियों पे देश का पैसा बर्बाद कर रही है जब कि पाकिस्तान ने अपने आतंकियों पर अपनी अदालतों में फेसला सुना कर बा इज्ज्त रिहा भी कर दिए।

    हमारी सरकार किस को दिखाने के लिए कसाब ओर उनके मरे हुवे आतंकियों पे मुकद्दमा चला रही है ओर दिखाने से होगा भी क्या पाकिस्तान को तो सुधरना नहीं, कब तक हम अपने देश के जवान ओर आम लोगो की शहादत देते रहेंगे क्या पकिस्तान से बात चीत करने से ये सब वापस आ जायेंगे?

    पृथ्वी राज चोव्हान ने मोहमद गोरी को १७ बार हराया और १७ बार माफ़ किया लेकिन गोरी ने १८वीं बार धोखे से पृथ्वी राज चोव्हान को हरा दिया और एक बार में ही पृथ्वी राज चोव्हान की आँख निकाल ली क्या हमारी सरकार भी यही चाहती है?

    यह कभी होगा नहीं पर शायद १८ वीं बार भारत को परमाणु बम्बों का सामना करना पड़े ओंर भारत अपनी आँख नहीं बचा पाया तो सरकार व हमारे प्रधान मंत्री क्या करेगें?

    प्रधान मंत्री जी मै भारत का एक आम नागरिक हूँ, मेरी बात पर कृपया ध्यान देना।

    धन्यवाद।

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  • Jul
    18

    ये लेख माधुरी कैरा द्वारा प्रेषित किया गया है, इनके बारे मे अधिक जानकारी इस पृष्ठ पर है।

     

    कोई आके मुझे लौटा दे वो प्यार, वो ममता का गाँव|

    जहाँ दिलों में भरी थी छोटी-छोटी खुशियाँ, हर दीं मानो होता था त्योहार||
    वर्तमान समय में हम छोटी-छोटी खुशियों से दूर होते जा रहे हैं| हम बड़ी-बड़ी उपलब्धियों मे खुशियाँ तलाशते हैं जो हुंए क्षणिक खुशियाँ देकर जाती हैं| आज कहाँ गया वो नानी का दुलार,दादी की मीठी फटकारआज हम चार जन को परिवार का नाम देते हैं|नानी-दादी को मेहमान कहते हैं|कितने संकुचित हो गये हैं-हमारे मन|आज हम विकास की बात करते हैं|विदेशों में जाकर आजीविका पाने को शान समझते हैं,परिवार से दूरी बडाने को जीवन की उन्नति कहते हैं,बूड़े मा-बाप को व्रडाश्रम में रखकर अपना स्टेटस मेन्टेंन् करते हैं|कहाँ है मेरे भारत का वो परिवार जहाँ एक के अस्वस्थ होने पर पूरा परिवार जुटता था देखभाल को|मन से अपना फ़र्ज़ निभाता था|उसी में खुशी पता था|एक-दूसरे से भावनाओं की मजबूत डोर से बंधा रहता था|

    आज हम क्षेत्र में संकुचित होते जा रहे हैं|क्यूँकि हमे अपना विकासा जो करना है|उसी व्यक्ति से निकटता रखनी है जिसमे हमारा भविष्य छिपा हो|आज का लोकप्रिय नारा है-बी प्रॅक्टिकल| हमारा मानना है कि भावनाओं कि ही परवाह करते रहे तो निश्चित तौर पर ज़िंदगी कि दौर में हम पिछर जाएंगे ,आंखिर हमे बड़ा आदमी बनकर नाम कमाना है |

    नक़ली खुशियों का खरीददार बनना हैसच में हम अंदर से कितने खोखले होते जा रहे हैं|यही कारण है तेजी से बिखरते परिवारों का|आज हर इंसान स्वयं में सीमित होकर रह गया है |उन्नति क़ी इस नई परिभाषा ने हमे तनाव, दबाव, कुंठा जैसे तोहफे दिए हैं|जो कभी हमसे क़त्ल करवाते हैं तो कभी आत्महत्या|जिससे समाज का ढाँचा असंतुलित हो रहा है| भावनाओं के आपसी जुड़ाव में कमी होने से आज हर व्यक्ति अकेला है जिस ने असुरक्षा क़ी भावना को जन्म दिया है| यूँ भी ताक़त बंद मुठ्ठी में ही होती है|इसलिए एक अच्छे जीवन के लिए एक-दूसरे से भावनात्मक जुड़ाव का होना अनिवार्य शर्त है|और तभी एक अच्छा समाज बनकर उभर सकता है|

    लेकिन ये तभी संभव है जब हर व्यक्ति इसके मोल को समझे,विकास क़ी आंधी दौड़ में शामिल ना हो|संवेदनहीनता हर व्यक्ति, हर समाज,और हर राष्ट्र के लिए घातक है|आज हमे समझना होगा कि अपनी छोटी-छोटी खुशियों को छोड़कर हम विकास की किस स्न्तीं दौड़ के लिए अपनी भावनाओं का गला घोंट रहें हैं|

    अब हमे वापस लौटना होगा -अपने घर|

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